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Miracle knowledge of Karmyog

In today’s fast moving and materialistic world, life is very busy and stressful. We have all kind of facilities in form of materialistic things, but they provide happiness only for time being. The essential things which are missing is physical and mental health. The worldly materialistic things shall not be of any worth in the absence of physical and mental well being  “YOGMANDIR” was established on 22nd February 2007 at kothi compound. In the premises of Bungalow no-1 of Dr. Rajiv Mishra, with a sole and only objective of physical and mental well being of society.

The journey of 8 years has led to develop this idea of YOGMANDIR as “KARMYOG MANDIR” and benefitting large section of society without any bias of gender, caste and religion. People of all ages from a small child to an old person have been involved in large populations and have taken advantages of the benefits of Yog and Karmyog. Karmyogmandir is open throughout the year, without any holiday from 6 to 8 am in the musical ambience and natural surroundings. The activities in Karmyogmandir include pranayam, yogasan (yogic exercises), laughing exercises, meditation, satsang and very important Karmyog gyan.

Here along with Yog, Karmyog education, social consciousness, social integrity, character building, personality development and optimism are the activities carried out in Karmyogmandir through various techniques & activities.

In last past 5 years, in Karmyogmandir the spiritual knowledge of the holy ‘SHRIMAD BHAGVATGITA’ is also  shared regularly contributing to the new name of ‘Yogmandir’ as “Karmyogmandir”.

Karmyog is the science of happy life or better said the art of happy living. Therefore, it is our duty to follow, learn and implement karmyog in our daily life, as the merging of the ganga, Yamuna, saraswati is called a “TRIVENI SANGAM” similarly the meeting of religion, science & art is called as karmyog.

Approximately 5000 years ago, GITA had elaborated the importance of selfless work. But unfortunately human being has not been able to understand the essence of GITA, if human being had understood the essence of GITA, all worries would had come to end and life would had been full of happiness and peace. He would have been able to live the satisfied and contented life.

Karmyog says “you have the right to perform your action, but you have no rights on results” as results are according to quality of your karm (action). Keep on performing your duties without worried to the result. As you have a rule in mind that result is always according to the karm (action).

Imagine the happiness you get, if you perform your duties with full devotion, results are usually as per your wish. As sadness comes only when results are not comes as per our

expectations. If we work with full dedication without worry then there is no chance for sadness or disturbance inside our inner body. If one follows above knowledge, then the inner body shall be at peace with no worries and will always experience happiness selfless work fills your inner self with happiness and peace and keeps you away from pride and false ego.

कर्मयोग मंदिर - एक परिचय

आज के इस तेज युग में भौतिक जगत की दौड़धाम वाली व्यस्त , सतत तनावयुक्त जिंदगी में हमे हर एक प्रकार की सुख , सुविधा , भौतिक वस्तु के रूप में सतत उपलब्ध है , परंतु जिस वस्तु की कमी है , वो है शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ जीवन |
हमारे पास दुनिया भर की सारी सुख सुविधाए हो,परन्तु यदि हमारा स्वास्थ्य ही ठीक न हो तो उनकी कोई कीमत नहीं है | इसी..... और केवल इसी उद्देश्य से ता. 22 फरवरी 2007 के दिन राजकोट के कोठी कम्पाउंड में “ योग – मंदिर की स्थापना बंगला नं – 1 के घर के प्रांगण में निःशुल्क एव निःस्वार्थ भाव के साथ की गई |
8 वर्ष के लम्बे समय में आज योग मन्दिर मजबूत वटवृक्ष बनकर “कर्मयोग मंदिर” बन गया है , और इस योग मदिर का लाभ छोटे बच्चो से लेकर किसी भी उम्र के बुजुर्गो सहित सैकड़ो भाई – बहेन किसी भी प्रकार के धर्म, जाति, संप्रदाय के भेदभाव बिना ले रहे है | नियमित रूप से 365 दिन, निरंतर किसी भी प्रकार की छुटी के बिना , प्रातःसुबह 6 से 8 तक यहाँ के प्राकृतिक वातावरण में मधुर संगीत की नाद के संग प्राणायाम , योगासन , हास्यासन एवं प्रार्थना तथा सत्संग की प्रवृति होती है | जिसका लाभ आज तक राजकोट के हजारो लोगो ने लिया है और शारीरिक , मानसिक तथा आध्यात्मिक विकास किया है |
यहाँ योग शिक्षा के साथ साथ सामजिक चेतना , सदभावना , चरित्र विकास (चरित्र निर्माण) तथा व्यक्तिगत विकास की प्रवृति एवं गीता सत्संग , आध्यात्मिक ज्ञान प्रतियोगिता , स्वयं सुधार प्रतियोगिता , योग मूल्यांकन प्रतियोगिता तथा स्वच्छ भारत अभियान , हेल्थ चेकअप कैंप इत्यादि प्रवृति भी साथ साथ होती है | उसके अलावा स्वस्थ जीवन के सात सोपान (आहार , पानी , धुप , हवा, नींद, व्यायाम, सद्विचार) को भी यहाँ वैज्ञानिक ढंग से समझाया जाता है |
विशेषकर पिछले 2 वर्ष से यहाँ कर्मयोग मन्दिर में पवित्र “श्रीमद भगवद गीताजी” के अमृत ज्ञान समान – “कर्मयोग ज्ञान” का भी नियमित रूप से सत्संग होता है और इसीलिए अब इस योग मन्दिर का नया नामकरण “कर्मयोग मन्दिर” में रूपांतरित हो गया है |
“कर्मयोग” जो जीवन को जीने का विज्ञान है, कला है और इसीलिए कर्मयोग का आचरण ही हमारा धर्म है | जिस तरह गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम त्रिवेणी संगम कहलाता है उसी तरह कर्मयोग यह धर्म, विज्ञान और और कला का त्रिवेणी संगम है | कर्मयोग के नियमित अभ्यास और सत्संग से इस कर्मयोग मंदिर के सभी योग साधक स्वयं विकास एवं सतत आत्म निरीक्षण द्वारा स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध है | इस कर्मयोग की विशेष जानकारी इस पुस्तक में दी गई है |
वर्तमान में “कर्मयोग मंदिर“ द्वारा नियमित रूप से सायं 5:45 से 6:45 दरमियान केवल महिलाओ के लिये योग केंद्र चलता है तथा एक और केंद्र रेलनगर , राजकोट में इसी दौरान चलता है |

इस तरह राजकोट में “ कर्मयोग मदिर “ की तीनो शाखाएं निरंतर कार्यरत है , जिसका लाभ समाज के विशाल वर्ग को प्राप्त हो रहा है और इस तरह समाज के विकास में वर्तमान में इस ” कर्मयोग मंदिर “ का विशाल योगदान है |

Gujarati content comming soon.....

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Dr. Rajeev Misra

Senior Divisional Medical Officer in Railway Hospital & Founder of Karmyog Mandir